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Language: Hindi
قُلِ ادْعُوا اللَّـهَ أَوِ ادْعُوا الرَّحْمَـٰنَ ۖ أَيًّا مَّا تَدْعُوا فَلَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ ۚ وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتْ بِهَا وَابْتَغِ بَيْنَ ذَٰلِكَ سَبِيلًا ﴿١١٠﴾ وَقُلِ الْحَمْدُ لِلَّـهِ الَّذِي لَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا وَلَمْ يَكُن لَّهُ شَرِيكٌ فِي الْمُلْكِ وَلَمْ يَكُن لَّهُ وَلِيٌّ مِّنَ الذُّلِّ ۖ وَكَبِّرْهُ تَكْبِيرًا ﴿١١١﴾
कुलिदउल्लाहा अविदउर रहमान...
(११०) कह दो, "अल्लाह को पुकारो या रहमान को पुकारो। जिस [नाम] से भी तुम पुकारो - उसी के लिए अच्छे नाम हैं।" और अपनी नमाज़ न तो बहुत ज़ोर से पढ़ो और न बहुत धीरे, बल्कि इसके बीच का रास्ता निकालो। (१११) और कह दो, "सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं, जिसने न कोई बेटा बनाया है और न कोई उसकी बादशाही में शरीक है और न कमज़ोरी की वजह से उसका कोई मददगार है; और उसकी बड़ाई बयान करो खूब बड़ाई।"
Reference: सूरा अल-इसरा १૭: ११०-१११