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Language: Hindi
إِنَّ شَجَرَتَ الزَّقُّومِ ﴿٤٣﴾ طَعَامُ الْأَثِيمِ ﴿٤٤﴾ كَالْمُهْلِ يَغْلِي فِي الْبُطُونِ ﴿٤٥﴾ كَغَلْيِ الْحَمِيمِ ﴿٤٦﴾ خُذُوهُ فَاعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَاءِ الْجَحِيمِ ﴿٤٧﴾ ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِ مِنْ عَذَابِ الْحَمِيمِ ﴿٤٨﴾ ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ ﴿٤٩﴾ إِنَّ هَـٰذَا مَا كُنتُم بِهِ تَمْتَرُونَ ﴿٥٠﴾
इन्ना शजरतज़ ज़क्कुम। तआमुल असीम...
(४३) बेशक, ज़क़्क़ूम का पेड़ (४४) गुनहगारों का खाना है। (४५) तेल की तलछट की तरह, वह पेटों में उबलेगा (४६) जैसे खौलता हुआ पानी उबलता है। (४७) [हुक्म होगा], "उसे पकड़ो और घसीटते हुए जहन्नम के बीच में ले जाओ, (४८) फिर उसके सिर पर खौलते हुए पानी का अज़ाब उंडेल दो।" (४९) [कहा जाएगा], "चख! तू तो बड़ा इज़्ज़तदार, कर्म वाला है! (५०) बेशक, यह वही है जिसमें तुम शक करते थे।"
Reference: सूरा अद-दुख़ान ४४: ४३-५०