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Language: Hindi
رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّتِي أَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَالِدَيَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَالِحًا تَرْضَاهُ وَأَصْلِحْ لِي فِي ذُرِّيَّتِي ۖ إِنِّي تُبْتُ إِلَيْكَ وَإِنِّي مِنَ الْمُسْلِمِينَ
रब्बी औज़िनी अन अशकुरा निमतकल लती...
ऐ मेरे रब, मुझे तौफीक दे कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ जो तूने मुझ पर और मेरे वालिदैन पर की है और यह कि मैं ऐसा नेक अमल करूँ जिससे तू राजी हो जाए और मेरी औलाद को मेरे लिए नेक बना दे। बेशक मैंने तेरी तरफ तौबा की, और मैं फरमाबरदारों (मुस्लिमों) में से हूँ।
Reference: सूरा अल-अहक़ाफ़ ४६:१५