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Language: Hindi
रसूल अल्लाह (ﷺ) यह दुआ पढ़ा करते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ النَّارِ وَعَذَابِ النَّارِ، وَفِتْنَةِ الْقَبْرِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ، وَشَرِّ فِتْنَةِ الْغِنَى، وَشَرِّ فِتْنَةِ الْفَقْرِ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ، اَللَّهُمَّ اغْسِلْ قَلْبِي بِمَاءِ الثَّلْجِ وَالْبَرَدِ، وَنَقِّ قَلْبِي مِنَ الْخَطَايَا، كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الْأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ، وَبَاعِدْ بَيْنِي وَبَيْنَ خَطَايَاىَ كَمَا بَاعَدْتَ بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَالْمَأْثَمِ وَالْمَغْرَمِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन फ़ितनतिन-नार, व अज़ाबिन-नार, व फ़ितनतिल-क़ब्र व अज़ाबिल-क़ब्र, व शर्रि फ़ितनतिल-ग़िना, व शर्रि फ़ितनतिल-फ़क़्र, अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन शर्रि फ़ितनतिल-मसीहिद-दज्जाल. अल्लाहुम्मग़सिल क़ल्बी बिमा-इष-षल्जि वल-बरद, व नक़्क़ि क़ल्बी मिनल-ख़ताया कमा नक़्क़ैतष-षौबल-अब्यदा मिनद-दनस. व बा-इद बैनी व बैना ख़ता-या-या कमा बा-अत्ता बैनल-मशरिक़ि वल-मग़रिब. अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-कसलि वल-मा-समि वल-मग़रम.
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ आग के फितने से, और आग के अज़ाब से, और कब्र के फितने से और कब्र के अज़ाब से, और मालदारी के फितने की बुराई से, और गरीबी के फितने की बुराई से। ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ मसीह दज्जाल के फितने की बुराई से। ऐ अल्लाह! मेरे दिल को बर्फ और ओलों के पानी से धो दे, और मेरे दिल को गुनाहों से ऐसे साफ कर दे जैसे तूने सफेद कपड़े को मैल से साफ किया, और मेरे और मेरे गुनाहों के बीच इतनी दूरी कर दे जितनी तूने पूरब और पश्चिम के बीच दूरी की है। ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ सुस्ती से, गुनाह से और कर्ज से।
Reference: बुख़ारी: ६३७७