Loading...
Language: Hindi
रसूल अल्लाह (ﷺ) फरमाया करते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْجُبْنِ وَالْبُخْلِ وَالْهَرَمِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ، اَللَّهُمَّ آتِ نَفْسِيْ تَقْوَاهَا وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا أَنْتَ وَلِيُّهَا وَمَوْلَاهَا، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ عِلْمٍ لَا يَنْفَعُ وَمِنْ قَلْبٍ لَا يَخْشَعُ وَمِنْ نَفْسٍ لَا تَشْبَعُ وَمِنْ دَعْوَةٍ لَا يُسْتَجَابُ لَهَا
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-अज्ज़ि वल-कसलि, वल-जुब्नि वल-बुख़लि, वल-हरमि व अज़ाबिल-क़ब्र, अल्लाहुम्मा आति नफ़्सी तक़्वाहा व ज़क्किहा अन्त ख़ैरु मन ज़क्काहा अन्त वलिय्युहा व मौलाहा, अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन इल्मिल-ला यन्फ़उ, व मिन क़ल्बिल-ला यख़-शउ, व मिन नफ़्सिल-ला तश-बउ, व मिन दावतिल-ला युस्तजाबु लहा.
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह मांगता हूँ कमज़ोरी और सुस्ती से, बुज़दिली और कंजूसी से, और बुढ़ापे और कब्र के अज़ाब से। ऐ अल्लाह, मेरे नफ़्स को परहेज़गारी अता कर और उसे पाक कर दे, तू ही उसे सबसे बेहतर पाक करने वाला है, तू ही उसका वली और मौला है। ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह मांगता हूँ ऐसे इल्म से जो फायदा न दे, ऐसे दिल से जो (अल्लाह से) न डरे, ऐसे नफ़्स से जो कभी न भरे (संतुष्ट न हो) और ऐसी दुआ से जो कुबूल न हो।
Reference: मुस्लिम: २७२२