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Language: Hindi
अबू बकरा (र.अ.) हर सुबह और शाम तीन बार यह कहते थे:
اَللَّهُمَّ عَافِنِيْ فِي بَدَنِي اَللَّهُمَّ عَافِنِيْ فِي سَمْعِيْ اَللَّهُمَّ عَافِنِيْ فِي بَصَرِيْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी बदनी, अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी सम्ई, अल्लाहुम्मा आफ़िनी फ़ी बसरी, ला इलाहा इल्ला अन्त.
ऐ अल्लाह! मेरे बदन को आफियत (सेहत) में रख! ऐ अल्लाह! मेरे कानों (सुनने की ताकत) को आफियत में रख! ऐ अल्लाह! मेरी आँखों (देखने की ताकत) को आफियत में रख! तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।
Reference: हसन. अबू दाऊद: ५०९०