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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) इस तरह दुआ किया करते थे:
اَللَّهُمَّ احْفَظْنِيْ بِالْإِسْلَامِ قَائِمًا، وَاحْفَظْنِيْ بِالْإِسْلَامِ قَاعِدًا، وَاحْفَظْنِيْ بِالْإِسْلَامِ رَاقِدًا، وَلَا تُشْمِتْ بِي عَدُوًّا وَلَا حَاسِدًا اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ كُلِّ خَيْرٍ خَزَائِنُهُ بِيَدِكَ، وَأَعُوْذُ بِكَ مِنْ كُلِّ شَرٍّ خَزَائِنُهُ بِيَدِكَ
अल्लाहुम्माह-फ़ज़्नी बिल-इस्लामि क़ाइमन, वह-फ़ज़्नी बिल-इस्लामि क़ा-इदन, वह-फ़ज़्नी बिल-इस्लामि रा-क़िदन, व ला तुश्मित बी अदू-वन व ला हासिदन, अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका मिन कुल्लि ख़ैरिन् ख़ज़ा-इनुहू बि-यदिक, व अऊज़ु बिका मिन कुल्लि शर्रिन् ख़ज़ा-इनुहू बि-यदिक.
ऐ अल्लाह! खड़े होते वक्त इस्लाम के साथ मेरी हिफाज़त कर, और बैठते वक्त इस्लाम के साथ मेरी हिफाज़त कर, और लेटते वक्त इस्लाम के साथ मेरी हिफाज़त कर, और किसी दुश्मन या हासिद (ईर्ष्यालु) को मेरी मुसीबत पर खुश न कर। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हर उस भलाई का सवाल करता हूँ जिसके खज़ाने तेरे हाथ में हैं, और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ हर उस बुराई से जिसके खज़ाने तेरे हाथ में हैं।
Reference: हसन (अल्बानी)। सिलसिला सहीहा: १५४०