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Language: Hindi
इब्न अब्बास (र.अ.) से रिवायत है: अल्लाह के रसूल (ﷺ), यह कहा करते थे:
اَللَّهُمَّ لَكَ أَسْلَمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْكَ أَنَبْتُ وَبِكَ خَاصَمْتُ اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِعِزَّتِكَ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ أَنْ تُضِلَّنِيْ أَنْتَ الْحَيُّ الَّذِيْ لَا يَمُوْتُ وَالْجِنُّ وَالْإِنْسُ يَمُوتُونَ
अल्लाहुम्मा लका अस्लम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कलतु, व इलैका अनब्तु, व बिका ख़ासम-तु, अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बि-इज़्ज़तिका, ला इलाहा इल्ला अन्त अन तु-ज़िल्लनी, अन्तल-हय्युल-लज़ी ला यमूतु, वल-जिन्नु वल-इन्सु य-मूतून.
ऐ अल्लाह, मैंने अपने आप को तेरे हवाले किया, और मैं तुझ पर ईमान लाया, और मैंने तुझ पर भरोसा किया, और मैं तेरी ही तरफ पलटा, और तेरी ही मदद से मैंने (दुश्मनों से) मुकाबला किया। ऐ अल्लाह, मैं तेरी इज़्ज़त की पनाह मांगता हूँ, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, कि तू मुझे गुमराह कर दे। तू वो ज़िंदा है जो कभी नहीं मरेगा, जबकि जिन्न और इंसान सब मर जाएंगे।
Reference: मुस्लिम: २७१७