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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) की एक दुआ इस तरह थी:
اَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ مُوْجِبَاتِ رَحْمَتِكَ وَعَزَائِمَ مَغْفِرَتِكَ وَالسَّلَامَةَ مِنْ كُلِّ إِثْمٍ وَالْغَنِيْمَةَ مِنْ كُلِّ بِرٍّ وَالْفَوْزَ بِالْجَنَّةِ وَالنَّجَاةَ بِعَوْنِكَ مِنَ النَّارِ
अल्लाहुम्मा इन्ना नस-अलुका मु-जीबाति रह्मति-क, व अज़ा-इमा मग़फ़िरति-क, वस-सलामता मिन कुल्लि इस्मिन, वल-ग़नीमता मिन कुल्लि बिर्रिन, वल-फ़ौज़ा बिल-जन्नति, वन-नजाता बि-अवनिका मिनन-नार.
ऐ अल्लाह! हम तुझसे उन चीज़ों का सवाल करते हैं जो तेरी रहमत को वाजिब करती हैं, और उन चीज़ों का जो तेरी माफी को जरूरी बनाती हैं, और हर गुनाह से सलामती का, और हर नेकी से फायदा उठाने का, और जन्नत की कामयाबी का, और तेरी मदद से आग (दोज़ख़) से निजात का।
Reference: हसन (अरनाऊत)। अल-अज़कार १/३४०