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Language: Hindi
एक बार अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने वज़ू किया और नमाज़ पढ़ी। फिर फरमाया:
اَللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِيْ وَوَسِّعْ لِي فِي دَارِيْ وَبَارِكْ لِي فِي رِزْقِيْ
अल्लाहुम्मग़-फ़िर ली ज़न्बी, व वस्सि ली फ़ी दारी, व बारिक ली फ़ी रिज़्क़ी.
ऐ अल्लाह, मेरे गुनाह माफ कर दे, और मेरे घर में वुसअत (कुशादगी) अता कर और मेरी रोज़ी में बरकत दे।
Reference: हसन. तिर्मिज़ी: ३५००, सहीहुल जामिअ: १२६५