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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) इस तरह दुआ किया करते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْهَدْمِ وَأَعُوْذُ بِكَ مِنَ التَّرَدِّيْ وَأَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْغَرَقِ وَالْحَرَقِ وَالْهَرَمِ وَأَعُوْذُ بِكَ أَنْ يَتَخَبَّطَنِيَ الشَّيْطَانُ عِنْدَ الْمَوْتِ وَأَعُوْذُ بِكَ أَنْ أَمُوْتَ فِي سَبِيْلِكَ مُدْبِرًا وَأَعُوْذُ بِكَ أَنْ أَمُوْتَ لَدِيْغًا
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-हद्मि, व अऊज़ु बिका मिनत-तरद्दी, व अऊज़ु बिका मिनल-ग़रक़ि, वल-हरक़ि वल-हरमि, व अऊज़ु बिका अन यत-ख़ब्-बत-नियश-शैतानु इन्दल-मौति, व अऊज़ु बिका अन अमूता फ़ी सबीलिक मुदबिरन, व अऊज़ु बिका मिन अन अमूता लदीग़ा.
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह मांगता हूँ (मकान वगैरह के) गिरने से, और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ (ऊंचाई से) गिरने से, और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ डूबने से, और जलने से और बुढ़ापे (की लाचारी) से। और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि मौत के वक्त शैतान मुझे अपने कब्ज़े में ले ले (बहका दे), और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि मैं तेरे रास्ते में पीठ फेर कर मार जाऊँ (मैदान-ए-जंग से भागते हुए), और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि मैं (किसी ज़हरीले जानवर के) डसने से मरूँ।
Reference: सहीह. अबू दाऊद: १५५२