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Language: Hindi
अबू हुरैरा (र.अ.) से रिवायत है: पैगंबर (ﷺ) कहा करते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ جَارِ السُّوْءِ فِي دَارِ الْمُقَامَةِ فَإِنَّ جَارَ الْبَادِيَةِ يَتَحَوَّلُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन जारिस-सू-इ फ़ी दारिल-मुक़ामह फ़-इन्न जारल-बादियति यत-हव्वल.
ऐ अल्लाह! बेशक मैं तेरी पनाह मांगता हूँ अपने मुस्तकिल (स्थायी) घर के बुरे पड़ोसी से, क्योंकि जंगल (सफ़र) का पड़ोसी तो बदल जाता है।
Reference: हसन (अल्बानी)। सहीहुल जामी: १२९०