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Language: Hindi
शिर्क से बचने के लिए, पैगंबर (ﷺ) ने फरमाया:
اَللَّهُمَّ إِنَّا نَعُوذُ بِكَ مِنْ أَنْ نُشْرِكَ بِكَ شَيْئًا نَعْلَمُهُ وَنَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا نَعْلَمُهُ
अल्लाहुम्मा इन्ना नऊज़ु बिका मिन अन नुशरिका बिका शै-अन न-लमुहू व नस्तग़-फ़िरुका लिमा ला न-लमुह.
ऐ अल्लाह, हम तेरी पनाह मांगते हैं इस बात से कि हम जानबूझकर तेरे साथ किसी को शरीक ठहराएं, और हम तुझसे माफी मांगते हैं उस (शिर्क) के लिए जो हम नहीं जानते।
Reference: हसन लि ग़ैरिही (अल्बानी)। सहीह अत-तरग़ीब: ३६