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Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) दुआ किया करते थे:
اَللَّهُمَّ ارْزُقْنِيْ حُبَّكَ وَحُبَّ مَنْ يَنْفَعُنِيْ حُبُّهُ عِنْدَكَ اَللَّهُمَّ مَا رَزَقْتَنِيْ مِمَّا أُحِبُّ فَاجْعَلْهُ قُوَّةً لِي فِيمَا تُحِبُّ اَللَّهُمَّ وَمَا زَوَيْتَ عَنِّيْ مِمَّا أُحِبُّ فَاجْعَلْهُ لِي فَرَاغًا فِيمَا تُحِبُّ
अल्लाहुम्मर-ज़ुक़्नी हुब्बका, व हुब्बा मन यन्फ़-उनी हुब्बुहू इन्दक. अल्लाहुम्मा मा रज़क़्तनी मिम्मा उहिब्बु फज-अल्हु कुव्वतल-ली फ़ीमा तुहिब्ब. अल्लाहुम्मा व मा ज़वैता अन्नी मिम्मा उहिब्बु फज-अल्हु फराग़ल-ली फ़ीमा तुहिब्ब.
ऐ अल्लाह, मुझे अपनी मोहब्बत अता कर, और उसकी मोहब्बत अता कर जिसकी मोहब्बत तेरे पास मुझे नफा दे। ऐ अल्लाह, जो मेरी पसंद की चीज़ें तूने मुझे दी हैं उन्हें मेरे लिए ताकत का ज़रिया बना दे उन कामों के लिए जो तू पसंद करता है। ऐ अल्लाह, और जो मेरी पसंद की चीज़ें तूने मुझसे रोक ली हैं, उन्हें मेरे लिए फुरसत (का ज़रिया) बना उन कामों के लिए जो तू पसंद करता है।
Reference: हसन (इब्न हजर). तख्रीज मिश्कात: ३/३१