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Language: Hindi
एक व्यक्ति तशह्हुद के बाद दुआ करता है -
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنَّ لَكَ الْحَمْدَ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ الْمَنَّانُ، بَدِيعُ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ، يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका बि-अन्ना लकल-हमदा, ला इलाहा इल्ला अन्तल-मन्नानु बदीउस-समावाति वल-अर्दि, या ज़ल-जलालि वल-इकराम! या हय्यु या कय्यूम
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे मांगता हूँ इस बात के वास्ते से कि सब तारीफ तेरे लिए है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, जो एहसान और भलाई करने वाला है, आसमानों और ज़मीन का पैदा करने वाला, ऐ जलाल और इज़्ज़त वाले, ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले, ऐ सबको थामने वाले। तब नबी (ﷺ) ने कहा: 'क्या तुम जानते हो कि उसने किस चीज़ के साथ दुआ की है?' उन्होंने कहा: "अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) सबसे बेहतर जानते हैं।" उन्होंने कहा: 'उस ज़ात की कसम जिसके हाथ में मेरी जान है, उसने अल्लाह को उसके सबसे बड़े नाम (इस्म-ए-आज़म) से पुकारा है, जिसे अगर इससे पुकारा जाए, तो वह जवाब देता है, और अगर इससे मांगा जाए, तो वह देता है।
Reference: सहीह (अल्बानी)। नसाई: १३००