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Language: Hindi
मुहम्मद (ﷺ) ने अपने रब से यह कहते हुए दुआ की:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ الْمَسْأَلَةِ، وَخَيْرَ الدُّعَاءِ، وَخَيْرَ النَّجَاحِ، وَخَيْرَ الْعَمَلِ، وَخَيْرَ الثَّوَابِ، وَخَيْرَ الْحَيَاةِ، وَخَيْرَ الْمَمَاتِ، وَثَبِّتْنِيْ، وَثَقِّل مَوَازِينِيْ، وَحَقِّقْ إِيْمَانِيْ، وَارْفَعْ دَرَجَاتِيْ، وَتَقَبَّلْ صَلَاتِيْ، وَاغْفِرْ خَطِيْئَتِيْ، وَأَسْأَلُكَ الدَّرَجَاتِ الْعُلَى مِنَ الْجَنَّةِ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فَوَاتِحَ الْخَيْرِ، وَخَوَاتِمَهُ، وَجَوَامِعَهُ، وَأَوَّلَهُ، وَآخِرَهُ وَظَاهِرَهُ، وَبَاطِنَهُ، وَالدَّرَجَاتِ الْعُلَى مِنَ الْجَنَّةِ آمِينْ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا آتِيْ، وَخَيْرَ مَا أَفْعَلُ، وَخَيْرَ مَا أَعْمَلُ، وَخَيْرَ مَا بَطَنَ، وَخَيْرَ مَا ظَهَرَ، وَالدَّرَجَاتِ الْعُلَى مِنَ الْجَنَّةِ آمِينْ، اَللَّهُمَّ إنِّي أَسْأَلُكَ أَنْ تَرْفَعَ ذِكْرِيْ، وَتَضَعَ وِزْرِيْ، وَتُصْلِحَ أَمْرِيْ، وَتُطَهِّرَ قَلْبِيْ، وَتُحَصِّنَ فَرْجِيْ، وَتُنَوِّرَ قَلْبِيْ، وَتَغْفِرَ لِي ذَنْۢبِيْ، وَأَسْأَلُكَ الدَّرَجَاتِ الْعُلَى مِنَ الْجَنَّةِ آمِينْ، اَللَّهُمَّ إنِّي أَسْأَلُكَ أَنْ تُبَارِكَ لِي فِي نَفْسِيْ، وَفِي سَمْعِيْ، وَفِي بَصَرِيْ، وَفِي رُوحِيْ، وَفِي خَلْقِيْ، وَفِي خُلُقِيْ، وَفِي أَهْلِيْ، وَفِي مَحْيَايَ، وَفِي مَمَاتِيْ، وَفِي عَمَلِيْ، فَتَقَبَّلْ حَسَنَاتِيْ، وَأَسْأَلُكَ الدَّرَجَاتِ الْعُلَى مِنَ الْجَنَّةِ، آمِينْ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका ख़ैरल मस-अलति, व ख़ैराद दुआइ, व ख़ै रन-नजाहि व ख़ैरल अमलि व ख़ैरस-सवाबि व ख़ैरल हयाति व ख़ैरल ममाति व सब्बितनी व सक्क़िल मवाज़ीनी व हक़्क़िक़ ईमानी वरफ़अ दरजाती व तक़ब्बल सलाती वग़-फ़िर ख़ती-अती व अस-अलुकद दरजातिल उला मिनल जन्नति. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका फ़वातिहल ख़ैरि व ख़वातिमहू, व जवामि-अहू, व अव्व लहू व आख़िरहू व ज़ाहिरहू व बातिनहू वद-दरजातिल उला मिनल जन्नति. आमीन. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका ख़ैरा मा आती व ख़ैरा मा अफ़-अलु व ख़ैरा मा अ-मलु व ख़ैरा मा बतना व ख़ैरा मा ज़हरा वद दरजातिल उला मिनल जन्नति. आमीन. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका अन तरफ़-अ ज़िक्री व तज़-अ विज़्री व तुस्लिह अम्री व तुतहहिरा क़ल्बी व तुहस्सिना फ़र्जी व तुनव्विरा क़ल्बी व तग़्फ़िरा ली ज़म्बी व अस-अलुकद दरजातिल उला मिनल जन्नति. आमीन. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका अन तुबारिका ली फ़ी नफ़्सी व फ़ी सम्ई व फ़ी बसरी व फ़ी रूही व फ़ी ख़ल्क़ी व फ़ी ख़ुलुक़ी व फ़ी अहली व फ़ी महयाय व फ़ी ममाती व फ़ी अमली फ़-तक़ब्बल हसनांती व अस-अलुकद दरजातिल उला मिनल जन्नति. आमीन.
ऐ अल्लाह मैं तुझसे बेहतरीन सवाल, बेहतरीन दुआ, बेहतरीन कामयाबी, बेहतरीन अमल, बेहतरीन सवाब (बदला), बेहतरीन ज़िन्दगी और बेहतरीन मौत का सवाल करता हूँ। और मुझे साबित कदम रख, मेरे (नेकियों के) पलड़े को भारी कर दे, मेरे ईमान को सच्चा (पुख्ता) कर दे, मेरे दर्जे को बुलंद कर दे, मेरी नमाज़ कुबूल फरमा, और मेरी खता माफ कर दे। और मैं तुझसे जन्नत में ऊँचे दर्जों का सवाल करता हूँ। आमीन। ऐ अल्लाह मैं तुझसे हर भलाई की शुरुआत, और उसके अंजाम, और उसकी जामे (समग्र) शक्लें, और उसका अव्वल और उसका आख़िर, उसका ज़ाहिर और उसका बातिन, और जन्नत में ऊँचे दर्जों का सवाल करता हूँ। आमीन। ऐ अल्लाह मैं तुझसे सवाल करता हूँ उस भलाई का जो मेरे पास आए, और उस भलाई का जो मैं करूँ, और अपने अमल की भलाई का, और जो मैं छिपाऊँ उसकी भलाई का, और जो मैं ज़ाहिर करूँ उसकी भलाई का, और जन्नत में ऊँचे दर्जों का। आमीन। ऐ अल्लाह मैं तुझसे सवाल करता हूँ कि तू मेरा ज़िक्र बुलंद कर दे, मेरा बोझ उतार दे, मेरे मामले को सुधार दे, मेरे दिल को पाक कर दे, मेरी शर्मगाह की हिफाज़त कर, मेरे दिल को रोशन कर दे, और मेरे गुनाह माफ कर दे। और मैं तुझसे जन्नत में ऊँचे दर्जों का सवाल करता हूँ। आमीन। ऐ अल्लाह मैं तुझसे सवाल करता हूँ कि तू मेरे नफ़्स में, मेरे कानों में, मेरी आँखों में, मेरी रूह में, मेरी बनावट में, मेरे अख़लाक में, मेरे परिवार में, मेरे जीने में, मेरे मरने में और मेरे अमल में बरकत दे और मेरी नेकियों को कुबूल फरमा। और मैं तुझसे जन्नत में ऊँचे दर्जों का सवाल करता हूँ। आमीन。
Reference: सहीह (हैसमी)। मजमा अल-ज़वाइद: १०/१०८