Loading...
Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) अपनी दुआओं में ये कहा करते थे:
اَللَّهُمَّ قَنِّعْنِيْ بِمَا رَزَقْتَنِيْ وَبَارِكْ لِي فِيهِ وَأَخْلِفْ عَلَيَّ كُلَّ غَائِبَةٍ لِي بِخَيْرٍ
अल्लाहुम्मा क़न्नि-अनी बिमा रज़क़्तनी व बारिक ली फीहि व अख़-लिफ़ अलैय्या कुल्ला ग़ा-इबतिन ली बि-ख़ैर.
ऐ अल्लाह, जो रोज़ी तूने मुझे दी है उस पर मुझे राज़ी (कानिअ) बना दे, और उसमें मेरे लिए बरकत दे, और हर वो चीज़ जो मुझसे गायब है (नहीं है) उसके बदले मुझे भलाई अता कर।
Reference: हसन (इब्न हजर)। फ़ुतुहातुर रब्बानिय्याह: ४/३८३