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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ إِيْمَانًا لَا يَرْتَدُّ، وَنَعِيْمًا لَا يَنْفَدُ، وَمُرَافَقَةَ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ (ﷺ) فِي أَعْلَى جَنَّةِ الْخُلْدِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका ईमानन ला यर्तद्दु व नईमन ला यन्फ़दु व मुराफ़क़त नबिय्यिना (ﷺ) फ़ी आला जन्नतिल-ख़ुल्द.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे ऐसे ईमान का सवाल करता हूँ जो (कभी) न फिरे (कमज़ोर न हो), और ऐसी नेमत का जो कभी खत्म न हो, और हमेशा रहने वाली जन्नत के ऊँचे दर्जों में हमारे नबी (ﷺ) का साथ मांगता हूँ।
Reference: हसन (अल्बानी)। सिलसिला सहीहा: ५/३૭९