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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ كُلُّهُ، اَللَّهُمَّ لَا قَابِضَ لِمَا بَسَطْتَ، وَلَا مُقَرِّبَ لِمَا بَاعَدْتَ، وَلَا مُبَاعِدَ لِمَا قَرَّبْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ. اَللَّهُمَّ ابْسُطْ عَلَيْنَا مِنْ بَرَكَاتِكَ وَرَحْمَتِكَ وَفَضْلِكَ وَرِزْقِكَ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ النَّعِيمَ الْمُقِيمَ الَّذِي لَا يَحُولُ وَلَا يَزُولُ. اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ النَّعِيمَ يَوْمَ الْعَيْلَةِ، وَالْأَمْنَ يَوْمَ الْحَرْبِ، اَللَّهُمَّ عَائِذًا بِكَ مِنْ سُوءِ مَا أَعْطَيْتَنَا، وَشَرِّ مَا مَنَعْتَ مِنَّا. اَللَّهُمَّ حَبِّبْ إِلَيْنَا الْإِيمَانَ وَزَيِّنْهُ فِي قُلُوبِنَا، وَكَرِّهْ إِلَيْنَا الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَ، وَاجْعَلْنَا مِنَ الرَّاشِدِينَ. اَللَّهُمَّ تَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ، وَأَحْيِنَا مُسْلِمِينَ، وَأَلْحِقْنَا بِالصَّالِحِينَ، غَيْرَ خَزَايَا وَلَا مَفْتُونِينَ. اَللَّهُمَّ قَاتِلِ الْكَفَرَةَ الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَنْ سَبِيلِكَ، وَيُكَذِّبُونَ رُسُلَكَ، وَاجْعَلْ عَلَيْهِمْ رِجْزَكَ وَعَذَابَكَ. اَللَّهُمَّ قَاتِلِ الْكَفَرَةَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ، إِلَهَ الْحَقِّ
अल्लाहुम्मा लकल-हम्दु कुल्लुहू, अल्लाहुम्मा ला क़ाबिज़ा लिमा बसत्त, व ला मुक़र्रिबा लिमा बा-अत्त व ला मुबा-इदा लिमा कर्रब्त व ला मु-ति-अ लिमा मन-त व ला मानि-अ लिमा अ-तैत. अल्लाहुम्मब-सुत अलैना मिन बरकातिका व रहमतिका व फ़ज़्लिका व रिज़्क़िक. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुकन-नईमल मुक़ीमल्लज़ी ला यहूलु व ला यज़ूल. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुकन-नईमा यौमल-अईलति वल-अम्ना यौमल-हर्ब, अल्लाहुम्मा आ-इज़न बिका मिन सू-इ मा अ-तैतना व शर्रि मा मन-त मिन्ना. अल्लाहुम्मा हब्बिब इलैनल ईमाना व ज़य्यिन्हु फ़ी कुलूबिना व कर्रिह इलैनल-कुफ़्रा वल-फ़ुसूक़ा वल-इसयान, वज-अल्ना मिनर-राशिदीन. अल्लाहुम्मा तवफ़्फ़ना मुस्लिमीन व अह-यिना मुस्लिमीन. व अल्हिक़्ना बिस्सालिहीना ग़ैर ख़ज़ाया व ला मफ़्तूनीन. अल्लाहुम्मा क़ातिलिल कफ़रतल्लज़ीना यसुद्दूना अन सबीलिक व युकज़्ज़िबूना रुसुलक वज-अल अलैहिम रिज्ज़का व अज़ाबक. अल्लाहुम्मा क़ातिलिल कफ़रतल्लज़ीना ऊतुल-किताब, इलाहल हक़्क़.
ऐ अल्लाह, तमाम तारीफें तेरे ही लिए हैं। ऐ अल्लाह, जिसे तू फैला दे उसे कोई समेटने वाला नहीं, और जिसे तू दूर कर दे उसे कोई करीब करने वाला नहीं, और जिसे तू करीब कर दे उसे कोई दूर करने वाला नहीं, और जिसे तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं, और जो तू दे दे उसे कोई रोकने वाला नहीं। ऐ अल्लाह, हम पर अपनी बरकतें, अपनी रहमत, अपना फज़्ल और अपना रिज़्क़ कुशादा (फैला) कर दे। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे उस हमेशा रहने वाली नेमत का सवाल करता हूँ जो न बदले और न खत्म हो। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे सख्त ज़रूरत (गरीबी) के दिन नेमत और जंग (खौफ) के दिन अमन का सवाल करता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह मांगता हूँ उस चीज़ की बुराई से जो तूने हमें दी और उस चीज़ की बुराई से जो तूने हमसे रोक ली। ऐ अल्लाह, ईमान को हमारा महबूब (प्यारा) बना दे और उसे हमारे दिलों में सजा दे, और कुफ्र, गुनाह और नाफरमानी को हमारे लिए नापसंद बना दे, और हमें हिदायत पाने वालों में शामिल कर। ऐ अल्लाह, हमें इस्लाम की हालत में मौत दे और इस्लाम की ही हालत में ज़िंदा रख, और हमें नेक लोगों के साथ मिला दे, न रुसवा होने वाले और न फितने में पड़ने वाले। ऐ अल्लाह, उन काफिरों (इनकार करने वालों) को हलाक कर जो तेरे रास्ते से रोकते हैं और तेरे रसूलों को झुठलाते हैं, और उन पर अपनी सज़ा और अज़ाब डाल। ऐ अल्लाह, उन काफिरों को हलाक कर जिन्हें किताब दी गई, ऐ हक़ (सच्चे) माबूद!
Reference: सहीह. अदबुल मुफ़्रद: ६९९