Loading...
Language: Hindi
अनस इब्न मालिक (र.अ.) से रिवायत है: पैगंबर (ﷺ) ये दुआएं पढ़ा करते थे:
اَللَّهُمَّ زِدْنَا وَلَا تَنْقُصْنَا وَأَكْرِمْنَا وَلَا تُهِنَّا وَأَعْطِنَا وَلَا تَحْرِمْنَا وَآثِرْنَا وَلَا تُؤْثِرْ عَلَيْنَا وَأَرْضِنَا وَارْضَ عَنَّا
अल्लाहुम्मा ज़िदना व ला तन्क़ुस्ना व अकरिमना व ला तुहिन्ना व अ-तिना व ला तहरिमना व आसिरना व ला तु-सिर अलैना व अर्ज़िना वर-ज़ अन्ना.
ऐ अल्लाह! हमें ज़्यादा (बरकत) दे और हममें कमी न कर, हमें इज़्ज़त दे और हमें ज़लील न कर, हमें (अपनी नेमतें) अता कर और हमें महरूम न रख, हमें तरजीह (प्राथमिकता) दे और हम पर किसी को तरजीह न दे, और हमें राज़ी कर दे और हमसे राज़ी हो जा।
Reference: हसन (बगवी)। शरहुस सुन्नाह: ३/१५४