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Language: Hindi
मैंने कहा, “ऐ अल्लाह के रसूल (ﷺ)! क्या आप मुझे ऐसी दुआ नहीं सिखाएंगे जो मैं सिर्फ अपने लिए पढूँ? पैगंबर (ﷺ) ने फरमाया, ”ज़रूर! कहो:
اَللَّهُمَّ رَبَّ مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ اِغْفِرْ لِي ذَنْبِيْ وَأَذْهِبْ غَيْظَ قَلْبِيْ وَأَجِرْنِيْ مِنْ مُضِلاَّتِ الْفِتَنِ مَا أَحْيَيْتَنَا
अल्लाहुम्मा रब्बा मुहम्मदिन नबिय्यि, इग़-फ़िर ली ज़न्बी व अज़-हिब ग़ैज़ा क़ल्बी व अजिरनी मिन मुज़िल्लातिल फ़ितनि मा अह-यैतना.
ऐ अल्लाह, नबी मुहम्मद (ﷺ) के रब! मेरे गुनाह माफ कर दे, मेरे दिल के गुस्से को दूर कर दे और जब तक तू हमें ज़िंदा रखे, हमें गुमराह करने वाले फितनों से पनाह दे।
Reference: हसन (हैसमी)। मजमाउज़ ज़वाइदाह १०/२૭