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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) नमाज़ में यह दुआ पढ़ते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الثَّبَاتَ فِي الْأَمْرِ وَالْعَزِيْمَةَ عَلَى الرُّشْدِ وَأَسْأَلُكَ شُكْرَ نِعْمَتِكَ وَحُسْنَ عِبَادَتِكَ وَأَسْأَلُكَ قَلْبًا سَلِيْمًا وَلِسَانًا صَادِقًا وَأَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِ مَا تَعْلَمُ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا تَعْلَمُ وَأَسْتَغْفِرُكَ لِمَا تَعْلَمُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका अस-सबाता फ़िल-अम्री वल-अज़ीमता अलार-रुश्दि व अस-अलुका शुक़्र नि-मतिका व हुस्न इबादतिका व अस-अलुका क़ल्बन सलीमं-व लिसानन सादिक़ं-व अस-अलुका मिन ख़ैरि मा त-लमु व अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा त-लमु व अस्तग़-फ़िरुका लिमा त-लमु.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तमाम मामलों में साबित कदमी और सही रास्ते (नेकी) पर डटे रहने का सवाल करता हूँ। मैं तुझसे तेरी नेमतों का शुक्र और तेरी बेहतरीन इबादत करने की तौफीक मांगता हूँ। मैं तुझसे सलामत दिल (साफ दिल) और सच बोलने वाली ज़बान मांगता हूँ। मैं तुझसे उस भलाई का सवाल करता हूँ जिसे तू जानता है, और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ उस बुराई से जिसे तू जानता है, और मैं तुझसे माफी मांगता हूँ उस (गलती) के लिए जिसे तू जानता है।
Reference: सहीह लि ग़ैरिही. तख्रीज मिश्कात: ९१५