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Language: Hindi
अनस (र.अ.) ने कहा, पैगंबर (ﷺ) कहा करते थे:
اَللَّهُمَّ اِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحُزْنِ وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْجُبْنِ وَالْبُخْلِ وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-हम्मि, वल-हज़नि, वल-अज्ज़ि, वल-कसलि, वल-जुब्नि, वल-बुख़्लि, व ज़ल-इद्दैनि, व ग़लबतिर्-रिजाल.
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ फिक्र और गम से, और आजीज़ी (हेल्पलेसनेस) और सुस्ती से, और बुज़दिली और कंजूसी से, और कर्ज़ के बोझ से और लोगों के (मुझ पर) हावी होने से।
Reference: बुख़ारी: २८९३