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Language: Hindi
اَلْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِيْ يُطْعِمُ وَلَا يُطْعَمُ، مَنَّ عَلَيْنَا فَهَدَانَا وَأَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَكُلَّ بَلَاءٍ حَسَنٍ أَبْلَانَا، اَلْحَمْدُ لِلَّهِ غَيرَ مُوَدَّعٍ وَّلَا مُكَافَأٍ وَّلَا مُكَافَأٍ وَّلَا مَكْفُوْرٍ وَّلَا مُسْتَغْنًى عَنْهُ، اَلْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِيْ أَطْعَمَ مِنَ الطَّعَامِ وَسَقٰى مِنَ الشَّرَابِ وَكَسٰی مِنَ العُرْيِ وَهَدٰى مِنَ الضَّلَالَةِ وَبَصَّرَ مِنَ العَمْيِ وَفَضَّلَ عَلٰى كَثِيْرٍ مِمَّنْ خَلَقَ تَفْضِيلًا، اَلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ.
अल्हमदु लिल्लाहिल-लज़ी अत-अम व ला युत-अमु, मन्ना अलैना फ़-हदाना व अत-अमना व सक़ाना व कुल्ला बला-इन हसनिन अबलाना...
तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं जो खिलाता है और उसे खिलाया नहीं जाता। उसने हम पर एहसान किया, हमें हिदायत दी, हमें खिलाया, पिलाया और हर अच्छी आज़माइश में डाला। तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं, जिसकी नियामतों को कभी नहीं छोड़ा जा सकता, जिसके बदले की उम्मीद नहीं की जा सकती (क्योंकि उसकी नियामतें अनगिनत हैं), और जिससे कभी बेपरवाह नहीं हुआ जा सकता।
Reference: सहीह (अहमद शाकिर)। 'उमदतुत तफ़सीर १/८६५