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Language: Hindi
सुबह और शाम की दुआ: एक बार कहें
يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيْثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِيْ كُلَّهُ وَلَا تَكِلْنِيْ إِلَى نَفْسِيْ طَرْفَةَ عَيْنٍ
या हय्यु या कय्यूम बिरह्मतिका अस्तगीस अस्लिह ली शानी कुल्लाहु व ला तकिलनी इला नफ्सी तरफता ऐनिन।
ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले, ऐ खुद कायम रहने वाले और सबको थामने वाले, मैं तेरी रहमत के वास्ते से मदद मांगता/मांगती हूँ, मेरे सारे काम सुधार दे और मुझे एक पल के लिए भी मेरे नफ़्स (आपा) के हवाले न कर। अनस (रज़ि.) ने कहा, अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने फातिमा (रज़ि.) से कहा कि, "मैं तुम्हें नसीहत करता हूँ कि तुम सुबह और शाम यह दुआ मांगों"
Reference: हसन (अल्बानी)। सिलसिला सहीहा: २२૭