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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने फरमाया, "अगर कोई बंदा गुनाह करता है, फिर अच्छी तरह वज़ू करता है, फिर खड़ा होकर दो रकात नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह से माफी मांगता है, तो अल्लाह उसे ज़रूर माफ कर देता है।"
وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ ذَكَرُوا اللَّهَ فَاسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ وَمَن يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا اللَّهُ وَلَمْ يُصِرُّوا عَلَىٰ مَا فَعَلُوا وَهُمْ يَعْلَمُونَ ﴿١٣٥﴾ أُولَٰئِكَ جَزَاؤُهُم مَّغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَجَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَنِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ ﴿١٣٦﴾
वल्लज़ीना इज़ा फअलू फाहिशतन...
और वो लोग कि जब कोई खुला गुनाह करते हैं या अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं, तो अल्लाह को याद करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं - और अल्लाह के सिवा कौन गुनाह माफ कर सकता है? - और वो अपने किए पर जानते बूझते हुए अड़े नहीं रहते। (सूरह आले इमरान: १३५)
Reference: सहीह. अबू दाऊद: १५२१