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Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) ने फज्र की नमाज़ पढ़ी, सलाम फेरने के बाद यह दुआ पढ़ी:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اَللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ أَنْ تَغْفِرَ لِي ذُنُوْبِيْ، إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका या अल्लाह! बि-अन्नकल-वाहिदुल-अहदुस-समदुल-लज़ी लम यलिद व लम यूलद, व लम यकु ल्लहू कुफुवन अहद, अन तग़्फ़िर ली ज़ुनूबी, इन्नका अन्तल्-ग़फूरुर-रहीम.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे सवाल करता हूँ, ऐ अल्लाह! क्योंकि तू ही वह अकेला, यकता, बेनियाज़ है, जिसने न किसी को जना और न वह जना गया, और जिसका कोई हमसर नहीं, कि तू मेरे गुनाह माफ कर दे, बेशक तू ही बहुत बख्शने वाला, निहायत रहम वाला है।
Reference: सहीह. अन-नसाई: १३०१