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Language: Hindi
Narrated from Abu Musa Ashari (RA), the Prophet (ﷺ) used to recite this dua:
اَللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي خَطِيْئَتِيْ وَجَهْلِيْ وَإِسْرَافِي فِي أَمْرِيْ وَمَا أَنْتَ أَعْلَمُ بِهِ مِنِّي اَللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي جِدِّيْ وَهَزَلِيْ وَخَطَئِيْ وَعَمْدِيْ وَكُلُّ ذَلِكَ عِنْدِيْ اَللَّهُمَ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ وَمَا أَنْتَ أَعْلَمُ بِهِ مِنِّي أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ وَأَنْتَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ
अल्लाहुम्मग़-फ़िर ली ख़ती-अती व जहली व इसराफ़ी फ़ी अमरी व मा अन्त अ-लमु बिही मिन्नी. अल्लाहुम्मग़-फ़िर ली जिद्दी व हज़ली व ख़त-ई व अमदी व कुल्लु ज़ालिका इन्दी. अल्लाहुम्मग़-फ़िर ली मा क़द्दम-तु व मा अख्ख़र-तु व मा असरर-तु व मा अओलन-तु व मा अन्त अ-लमु बिही मिन्नी. अन्तल-मुकद्दिमु व अन्तल-मुअख्खिरु व अन्ता अला कुल्लि शय-इन क़दीर.
ऐ अल्लाह, मेरी खतायें, मेरी जहालत (नादानी), मेरे मामले में मेरी ज़्यादती, और वह (गुनाह) जो तू मुझसे बेहतर जानता है, सब माफ कर दे। ऐ अल्लाह, मेरी संजीदगी और मज़ाक, मेरी गलती और जानबूझकर किए गए गुनाह, और ये सब मेरे अंदर मौजूद हैं, माफ फरमा। ऐ अल्लाह, जो मैंने पहले किया और जो बाद में किया, जो छिपा कर किया और जो खुल्लम-खुल्ला किया, और जिसे तू मुझसे बेहतर जानता है, सब माफ कर दे। तू ही आगे करने वाला और तू ही पीछे करने वाला है, और तू हर चीज़ पर कादिर है।
Reference: मुस्लिम: २७१९