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Language: Hindi
सुबह और शाम यह दुआ पढ़ें:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي دِينِيْ وَدُنْيَايَ وَأَهْلِيْ، وَمَالِيْ، اَللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِيْ، وَآمِنْ رَوْعَاتِيْ، اَللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ وَمِنْ خَلْفِي وَعَنْ يَمِيْنِيْ وَعَنْ شِمَالِي وَمِنْ فَوْقِيْ وَأَعُوْذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِيْ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुकल-अफ़्वा वल-आफ़ियता फ़िद-दुन्या वल-आखिरह. अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुकल-अफ़्वा वल-आफ़ियता फ़ी दीनी व दुन्याय व अहली व माली. अल्लाहुम्मस-तुर अवराती व आमिन् रौ-आती. अल्लाहुम्मह-फ़ज़नी मिम-बैनि यदय्या व मिन ख़ल्फ़ी व अन यमीनी व अन शिमाली व मिन फ़ौक़ी, व अऊज़ु बि-अज़मतिका अन उख़ताला मिन तहती.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे दुनिया और आखिरत में माफी और आफियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने घर-बार और अपने माल में माफी और आफियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मेरे ऐबों को ढाँप ले और मुझे मेरी घबराहटों से अमन दे। ऐ अल्लाह, मेरी हिफाज़त कर मेरे आगे से, मेरे पीछे से, मेरे दायें से, मेरे बायें से और मेरे ऊपर से। और मैं तेरी बड़ाई की पनाह माँगता हूँ इस बात से कि मैं अपने नीचे से (ज़मीन में) धँसा दिया जाऊँ।
Reference: सहीह. अबू दाऊद: ५०७४