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Language: Hindi
अल-हसन इब्न अली (रज़ि.) से रिवायत है: अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने मुझे कुछ शब्द सिखाए जो मैं वित्र में कहता हूँ -
اَللَّهُمَّ اهْدِنِيْ فِيمَنْ هَدَيْتَ وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ وَتَوَلَّنِيْ فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ فَإِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَ إِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ وَلَا يَعِزُّ مَنْ عَادَيْتَ تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ
अल्लाहुम्माह-दिनी फ़ीमन हदैत, व आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैत, व तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैत, व बारिक ली फ़ीमा अतैत, व क़िनी शर्र मा क़ज़ैत, फ़-इन्नका तक़ज़ी व ला युक़ज़ा अलैका, इन्नहू ला यज़िल्लु मन वालैत, व ला यइज़्ज़ु मन आदैत, तबारक्ता रब्बना व त-आलैत
ऐ अल्लाह, मुझे उन लोगों में हिदायत दे जिन्हें तूने हिदायत दी है, और मुझे उन लोगों में आफ़ियत दे जिन्हें तूने आफ़ियत दी है। और मुझे उन लोगों में अपने संरक्षण में ले जिन्हें तूने अपने संरक्षण में लिया है। और जो कुछ तूने मुझे दिया है उसमें मुझे बरकत दे। और मुझे उस बुराई से बचा जो तूने तय की है। निस्संदेह, तू ही फ़ैसला करता है और तेरे ख़िलाफ़ फ़ैसला नहीं किया जा सकता, और जिसे तूने अपना लिया वह अपमानित नहीं होता और जिससे तूने दुश्मनी रखी वह इज़्ज़त नहीं पाता। ऐ हमारे रब, तू बरकत वाला और सर्वोच्च है।
Reference: सहीह (अल्बानी)। अबू दाऊद: १४२५